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खुश रहिये - बेवजह

खुश रहने के लिए कुछ भी जरुरी नहीं है। न कोई कारण , न कोई वस्तु , न कोई घटना। खुश रहना फ्री है , आपको पैसे भी नहीं खर्चने होंगे। न किसी को कुछ देना है न ही कुछ लेना। फिर क्यों खुश नहीं रहा जा सकता। दलाई लामा कहते है - जीवन का उद्देश्य ही "खुश रहना " होना चाहिए। ख़ुशी का कोई दूसरा शॉर्टकट नहीं है। यह एक ऐसी चीज है जो आप अंदर से महसूस करते है। यह मूल रूप से मन की एक स्थिति है। ये हमारे मन के सकारात्मक तरीके से सोचने और काम करने से हासिल होती है। नकारात्मक विचारो से बच कर रहना , और सकारात्मक होकर खुद के उज्जवल पक्ष को देखना ही ख़ुशी देता है। ख़ुशी हमारे भीतर से आती है। हर एक चीज हमें ख़ुशी देती है। इसका कोई मापदंड नहीं है। कोई लिमिट नहीं है। कोई सीमा नहीं है।

हर चीज में ख़ुशी तलाशिये

प्रकृति ने जो भी बनाया है आप उस पर छिपी ख़ुशी को देख सकते है , महसूस कर सकते है। एक बार अपने आस पास सर घुमा कर देखिये। बहुत कुछ ऐसा दिखाई देगा जिस पर एक छिपी हुई मुस्कान होगी । क्या कभी बच्चो की टोली को देखा है जो अपनी धुन में प्रफुल्लित होते है। चाहे किसी भी परिस्थति में हो , कोई भी दुविधा में हो , आप उनकी टोली को एक कदम आगे ही देखेंगे। शोर मचाते है , क्रीड़ा करते है , दुसरो की नक़ल भी उतारते है , न कोई डर न कोई भय। हंसी ठिठोली , मौज मस्ती करती हुई टोली। क्या आप ऐसा कोई कारण खोज सकते है जो उन्हें खुश रहने पर मजबूर करता हो ? नहीं , वो खुश रहने के लिए मजबूर नहीं है, कोई कारण नहीं ढूंढते , वो तो बस खुश है बिना वजह..

रिश्तो में ख़ुशी

रिश्ते तो सिर्फ मनुष्य ही बना सकता है। अपने साथी को खुश करिये , उनका ख्याल रखे। एक स्वस्थ रिश्ते को बना कर रखने के लिए समय दीजिये। क्योकि खुशियों की शुरुआत अपनों से ही होती है। जब आपके अपने खुश होंगे तो आसपास का माहौल खुशनुमा होगा। उस माहौल में रहने वाले लोगो पर भी उसका असर होगा। इसलिए शुरुआत रिश्तो से करिये। जो दूर है उन्हें पास लाइए। उन्हें समय दीजिये , उनके साथ बाहर जाइए। और उनकी विचारो की भी क़द्र करिये। अपनों के चेहरे पर मुस्कराहट लाइए , उनके साथ हँसिये , फिर देखिये शुरुआत कैसी होती है। जो आप अपनों के देंगे वही वो आपको लौटाएंगे। खुशिया देंगे तो खुशिया पाएंगे।

धन की ख़ुशी

धन खुश रहने का एक माध्यम है। ये भी बिलकुल सही है की ख़ुशी खरीदी नहीं जा सकती, परन्तु धन से आप वो सारी चीजे खरीद सकते है जो आपको खुश और प्रसन्न रखने में सहायता करती है। अपने मनपसंद चीजों को खरीदने के लिए धन जरुरी है , दुसरो की सहायता के लिए धन जरुरी है। किसी की जरुरत को आप पूरा कर रहे है तो वो धन आपके साथ दुसरो को भी ख़ुशी देगा। ये देने का सौभाग्य है। कही बाहर जाइए , गिफ्ट खरीदिये , दान दीजिये , किसी जरूरतमंद की मदद करिये , किसी गरीब बच्चे को गोद लीजिये और उस बच्चे के जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करिये। ये सारी बातें आपको खुशिया ही देने वाली है। इसलिए धन वो सारी चीजे दे सकता है जो आपके साथ दुसरो के चेहरे पर भी मुस्कराहट लाये।


प्रकृति से सीखिए खुश और क्रियाशील रहना

यदि आप प्रकृति के करीब है , तो आप अपने सबसे अच्छे साथी के साथ है। प्रकृति आपकी अपनी साथी है। यदि आप प्रकृति के बीच रहने की आदत बना ले तो प्रकृति ही आपको खुश रहना , उल्लसित रहना सीखा देगी। कभी किसी नदी के किनारे बैठ कर निहारिये। देखिये कैसे उसकी तरंगे उठती है , बहती है , बिना किसी बाधा के निरन्तर क्रियाशील होती है। किसी खुले मैदान में जाइये , बहती हवा का आनंद लीजिये , क्या बाधा है हवा के बहने में ? कुछ भी तो नहीं। हरे भरे पहाड़ो के बीच जाइये , झूमकर गीत सुनाने वाले वृक्ष आपको रोमांचित तो कर ही देंगे। किसने रोका है इन वृक्षों को ? सूरज को उगते और ढलते देखिये , चिडियो को आसमान में स्वच्छंद विचरण करते देखिये। क्या प्रकृति में कोई ऐसी चीज है जिसमे प्रसन्नता न झलकती हो। उल्लास ही प्रकृति का स्वभाव है।

अपनी आदतों में ख़ुशी

अपनी रोज की आदतों को अपनी ख़ुशी का जरिया बनाइये। हर इंसान में कुछ न कुछ अच्छी आदते होती ही है। जिससे उन्हें ख़ुशी मिलती है। किसी को लिखना पसंद है , किसी को घूमना , किसी को कुकिंग पसंद है तो किसी को कार ड्राइविंग। बहुत सी आदते ऐसी होती है जो प्रकृति ने हमें दिया है , क्यों न इन्ही आदतों का लुत्फ़ उठाये ? आदते इंसान का नजरिया बदलती है। सकारात्मक आदते जीवन में उल्लास लाती ही है। इसलिए अपनी अच्छी आदतों को अपना दोस्त बनाइये और हमेशा उनके साथ रहिये।

ख़ुशी को आकर्षित करने के तरीके

आप अपनी आदतों में ख़ुशी को शामिल कर सकते है और इसे आसानी से आकर्षित भी कर सकते है। जैसे :-

संतुष्ट रहिये :- कभी कभी अतिउत्साह तथा उदास होने की जगह शांत भावनाओ और संतोष जैसी भावनाओ को आकर्षित करना चाहिए। आप जैसे भी है , जिस भी स्तिथि में है , संतुष्ट और प्रसन्न रहने की कोशिश करिये।

वर्तमान में जियो :- अपनी पिछली गलतियों और बुरे समय को भूल जाइये। गलतिया सभी से होती है , अच्छा बुरा सभी के साथ होता है , कोई भी पूरी तरह संपूर्ण नहीं होता। इसलिए पिछली बातो को भूलकर वर्तमान में रहिये और भविष्य की चिंता भी छोड़िये। छोटे बच्चो के देखिये - उन्हें न बीते हुए समय का दुःख है न ही आने वाले भविष्य की चिंता। वो वर्तमान में जीते है और हमेशा खुश रहते है। एक छोटे बच्चे के तरह बनिए।

आभारी होना:- जो भी हुआ वो आपके साथ अच्छा हुआ। जो नहीं हुआ वो भी अच्छा है। आपको जो भी मिला उसके लिए भगवान का आभार व्यक्त करिये। जो होता है अच्छे के लिए होता है , जो नहीं होता वो ज्यादा अच्छे के लिए होता है , क्योकि वो भगवान की मर्जी होती है। और भगवान् की मर्जी कभी गलत नहीं होती।

सकारात्मक रहिये :- अपने सभी विचारो को सकारात्मक रूप दीजिये , नकारात्मक विचारो को अपने आसपास भी न भटकने दे। क्योकि एक बार नकारात्मक विचार हमारे मन में घर कर जाते है तो पूरी ज़िन्दगी नकारात्मकता से भर जाती है। सकारात्मकता अच्छी बातो को जीवन में आकर्षित करती है , और नकारात्मकता बुरी चीजों को आकर्षित करती है। इसलिए ख़ुशी को महसूस करने का एक मात्रा तरीका है कि आपके पास जो कुछ भी है उसके बारे में अच्छा महसूस करे


ख़ुशी अच्छे जीवन के लिए आवश्यक

ख़ुशी ऐसी चीज है जो सभी के लिए जरुरी है ,ताकि लोग अच्छा जीवन जी सके। यह व्यक्ति की भावनात्मक भलाई के लिए आवश्यक है। ख़ुशी के कई कारण हो सकते है , परन्तु दुर्भाग्य ये है की लोग अपने निजी जिंदगी में इतने व्यस्त है कि इन छोटे- छोटे कारणों की तरफ ध्यान ही नहीं देते। यही कारण है की तनाव,चिंता और अवसाद के मामले बढ़ रहे है। ये भी जीवन का एक पहलु है। परन्तु खुशी का कोई कारण नहीं होता। हम अपने नकारात्मक विचारो को दरकिनार करके अपने जीवन के इस अनमोल क्षणों को जी ही सकते है।

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